हिंदी में 5 सदाबहार किताबें जो बार-बार पढने का दिल करे

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हिंदी किताबें सिर्फ कोई पन्ने या फिर कुछ शब्द नहीं हैं बल्कि एक ऐसी धरोहर है जो हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है। इन्हें पढने से आप वो जान पाते है जो शायद बहुत पीछे रह गया है और हमें दूसरों से अलग बनाता है।अगर आपने अभी तक नही पढीं है ये किताबे, तो एक बार इन्हें ज़रुर पढे।

आजकल इंटरनेट का जमाना है जहां एक बटन पर ढेरो वेबसीरिज, विडियोज और शोज़ उपलब्ध है।

लोकिन एक जमाने में मनोंरंजन का मतलब होता था अच्छी हिंदी किताबें पढना जिसमें हो सुदंर और मनोरंजक कविता, कहानी, लघुकथा और शब्दों का जादू।

अगर आप इस आधुनिक दौर से थोड़ा ब्रेक चाहते हैं और पहुंचना चाहते है उस दौर में जब किताबें सदाबहार हुआ करती थी तो आप एकदम सही जगह है क्योंकि आज हम इसी पर बात करने जा रहे हैं।

हिंदी एक भाषा से ज्यादा है क्योकि ये एक ऐसा भाव है जो दिल को छू लेता है... ये दिलो को दिलों से जोड़ता है।

यूँ तो जमाना ज़रा थोड़ा अंग्रेजी हो गया है लेकिन हिंदी की कुछ ऐसी किताबें हैं जो सदाबहार है। इन्हें आप किसी भी जमाने में पढो, आपको इनसे प्यार हो ही जायेगा।

ये किताबें सिर्फ किताबों से कहीं ज्यादा है...क्योंकि इनके शब्द आपको एक दूसरी ही दुनिया में ले जाते हैं। ये किताबे आपको इस कदर भारतीय संस्कृति से जोड़ देगी की आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

और इसीलिये हम आज आपको बताने जा रहे है उन 5 हिंदी किताबों को बारे में जो सदाबहार हैं। आइये जानते हैं विस्तार से -

1. गोदान –

इसे जितना पढा जायें, उतना कम है क्योंकि

1936 में इस सबसे महत्तवपूर्ण किताब का प्रकाशन, बंबई के एक प्रकाशक संस्था ने किया था और उसके बाद से जिसने भी इस हिंदी किताब को पढा वो इसका मुरीद ही हो गया।

गोदान एक ऐसी सदाबहार हिंदी किताब है जिसे आप जितना भी पढ लें आपको बोरियत बिल्कुल भी नहीं होगी।

कहना गलत ना होगा कि प्रेमचंद द्वारा दिया गया ये हमारे समाज को एक नायाब तोहफा है।

गोदान ना केवल मुंशी प्रेमचंद जी का अंतिम बल्कि सबसे महत्वपूर्ण उपन्यासों में से एक है। दूसरे शब्दों में ये कहा जा सकता है कि ये सबसे ज्यादा अच्छी कृतियों में से एक है । इसकी बात ही अलग है।

  • क्यूँ है गोदान इतनी खास –

अब बात आती है कि क्या है ऐसी बात जो इसे औरो से अलग बनाती है.. और सीधा सा जवाब ये है कि ये किताब सीथे तौर पर हमारे भारतीय समाज, और परिवेश का चित्रण बहुत ही सुंदर तरीके से करती हे। गोदान इतनी सुंदरता से हमारे भारतीय ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का चित्रण करती है आप इसे बार-बार पढना पसंद करेंगें। गोदान बहुत ही सरलता से गांधीवाद, मार्क्सवाद और प्रगदिवाद को भी दर्शाती है।

  • क्यूँ इसे बार-बार पढने को जी चाहता है -

जब बात होती है हिंदी साहित्य की तो इस किताब को सबसे बड़े उदाहरण को रुप में लिया जाता है। चाहें वो इस उपन्यास का नायक हो होरी या फिर नायिका धनिया, पाठक इनसे इस कदर जुड़ जाता है कि वो इन्हें बार-बार पढना चाहता है।

मुंशी प्रेमचंद की ये किताब सिर्फ किताब नहीं है ब्लिक एक ऐसा मर्म है, प्रेम है जो जितना पढा जाए, उतना कम है...

 

2. हरिवशराय बच्चन की मधुशाला, जिसका नशा ही कुछ और है –

और इस हिंदी किताब का नाम जितना ज्यादा मनमोहक है उससे कहीं ज्यादा इसमें लिखा हुआ दिल छु लेता है।

 जी हां, सदाबहार हिंदी किताबों की गणना मधुशाला का नाम लिये बिना नहीं हो सकती है। ये सबसे ज्यादा प्रसिद्ध साहित्यों में से एक है।

  • मधुशाला लिखने का कारण -

मधुशाला को जिस समय लिखा गया था उस समय आसपास का वातावरण चिंता से ग्रसित था। उस समय गांधी जी का सत्याग्रह आंदोलन सफल नहीं रहा था, बहुत से लोगों के पास काम नहीं था, और मधुशाला को लिखने का मकसद था लोगों को अवसाद और चिंता से दूल ले जाना। और लोगों को इतनी ज्यादा पसंद आयी की इसकी प्रशंसा सब तरफ होने लगी। इसे पढने से एक नयी ऊर्जा का संचार हो जाता है और नकारत्मकता से मुक्ति मिलती है।

  • क्यूँ पढे मधुशाला को –

इस किताब के अद्भूद काव्य आपको प्रेम से परिपूर्ण कर देगा। आप जितना ज्यादा इस पढेगें, उतना ज्यादा इस किताब के सौंदर्य में डूबते जायेंगें। इस किताब को पढते समय आपको लगेगा की मदिरा यानि शराब के बारें में बात की जा रही है लेकिन असल में यहां जिंदगी के बारे में बात करी है। जिंदगी की कठिनाईयों के बारे में बातें की जा रही है।

जब जब बात होगी हिंदी साहित्य की, मधुशाला का नाम हमेशा लिया जायेगा क्योकि ये पढने वाले में एक नया जोश और जुनून जोड़ देती है।

 

3. अप्सरा जो कि आपको एक सयंमित नारीवाद के दर्शन कराती है (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की) –

और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की अप्सरा के तो क्या ही कहने... इसके बिना हिंदी साहित्य थोड़ा सा अधूरा माना जायेगा। हम सभी जानते है कि सूर्यकांत त्रिपाठी निराल जी को छायावाद के एक सबसे बड़े स्तम्भं में से बनाया जाता है।

उनके जीवन का दर्द उनके लिखे गये साहित्या में साफ झलकता है। वो हमेशा से ही समाज में हो रहे अन्याय और उत्पीढन के खिलाफ रहे हैं। और ये उनकी लिखी गई कविताओं में दिखता भी है।

  • अप्सरा जो नारीवाद से आपको जोड़ती है –

अप्सरा एक ऐसी किताब है जिसमें नारी को दो भावों के ऊपर ध्यान दिया गया है। एक तो उसकी कोमलता और दूसरी उसकी कठोरता की ओर। अगर आज के परिप्रेक्ष्य में इसे देखा जाये तो ये नारीवाद की ओर इंगित करती है। अप्सरा बती है कि नारी के द्वारा किया जाने वाला संघर्ष को।

  • क्यूँ पढे अप्सरा को –
  • अप्सरा को नारी एक ऐसी छवि के बारे में बताती है जो शायद आपने कभी महसूस ना की हो। ये आपको एक अलग दुनिया में ले जाती है।
  • आपको ये किताब पढनी चाहिये अगर आप विश्वास करते है कि आपको नारी के संघर्षों के बारे में गहनता से जानना है।
  • ये किताब एक तरह से नारीवाद को समर्पित है लेकिन ये इस विषय के साथ बहुत ही ज्यादा न्याय करती है और यही चीज इसे सबसे अलग बनाती है।
  • इस किताब में भाषा का जिस तरह से प्रयोग किया गया है वो भी काबिले-तारीफ है काफी।

 

4. यामा जो आपको मन को शब्दों से भिगा देती है (महादेवी वर्मा जी की) –

और महादेवी वर्मा जी की किताबों को बारे में जितना कहा जाये वो कम ही है। ये किताबें अपने आप में बहुत ही खास है कि इनको पढना लगभग ऐसा है जैसे कि आप अपने कोई फिल्म चलते हुये देख रहे हो।

चाहे बात हो लघु कहानियों की या फिर कविताओं की महादेवी वर्मा जी ने सबकुछ बहुत ही बखूबी लिखा है और जिसने भी पढा वो मंत्र मुग्ध हुये बिना नहीं रह सकता है।

क्यूं है यामा सबसे अलग –

  • यामा उनके द्वारा लिखी हुयी किताबों में से सबसे अच्छी वाली किताबों में से एक है। अगर आपको प्रकृति से जुड़ी किताबे पढना अच्छा लगता है तो आपको ये किताबें बहुत ही ज्यादा अच्छी लगेगी।
  • यामा में जिस तरह से शब्दों का प्रयोग किया गया है वो भी बहुत ही सुंदर है। सरल शब्दों में गहरी बात करने की कला आप इस हिंदी किताब से सीख सकते है।
  • आप यामा को कितनी बार भी पढ लें, इसको आप बार-बार पढना पसंद करेंगें।
  • इनके द्वारा लिखी यामा को साहित्य का पुरस्कार भी मिला है जैसे कि साहित्य अकादमी और जननपीठ अवार्ड। इसके अलावा पद्मा भूषण और पद्मा विभूषण भी इन्हें मिला है। महादेवी जी को आधुनिक भारत की मीरा भी कहा जाता है।

 

5. तमस आपको अलग दुनिया में ले जाती है (भीष्म साहनी) –

और हिंदी की सदाबहार किताबों में से एक तमस भी है जिसे लिखा है भीष्म साहनी जी ने। तमस आपको बताती है उस समय के बारे में जब देश का बंटवारा हो रहा था। और इसे साहित्या अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया है । तमस का सीधा सा अर्थ है अंधेरे से । और ये कहानी है एक छोटे से कस्बे के बारें में जब चारों तरफ झग़डे हो रहे थे। इस किताब पर एक टेलिवीजिन धारावाहिक भी बना था जो कि बाद में दूरदर्शन पर आता था।

  • क्यूँ है तमस एक सदाबहार हिंदी किताब –
  • आपको तमस जरूर पढनी चाहिये अगर आप उस समय के भारत के बारें में जानना चाहते हैं जब बंटवारा हो रहा था।
  • तमस आपको एक कड़वे और साथ-ही-साथ थोड़ा सा मीठा अनुभव कराती है।
  • जहां तमस में एक तरफ आप कहानी पढते हैं, वहीं दूसरी तरफ आपको बहुत सी रोचक जानकारियां भी मिलती है जो कि आपको आजकल की किताबों में देखने को नहीं मिलती है।

अगर आप ये उपन्यास नहीं पढते हैं तो आप काफी कुछ मिस कर रहे हैं।

ये हिंदी किताबें गजब की है । ये एक तरफ तो आपका मनोरंजन करती है तो वहीं दूसरी तरफ आपको जानकारी के घूँट भी देती जाती है। आजकल हम इन्हें भूलते जा रहे है। अगर आप भी कुछ नया और अलग लेकिन कुछ पुराना पढना चाहते है तो ये 5 हिंदी किताबे जरूर पढें क्योंकि आपको एक अलग ही अनुभव होगा।

और अंत मे  -

हिंदी किताबें सिर्फ कोई पन्ने या फिर कुछ शब्द नहीं है बल्कि एक ऐसी धरोहर है जो हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है। इन्हें पढने से आप वो जान पाते है जो शायद बहुत पीछे रह गया है और हमें दूसरों से अलग बनाता है।

अगर आपने अभी तक नही पढी है ये किताबे, तो एक बार इन्हें जरुर पढे।

नोट: सभी फोटे का स्त्रोत Amazon है।

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