महिलाओं में विटामिन 'ए' की कमी

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विटामिन पदार्थों का एक समूह है जिसकी शरीर को स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए कम मात्रा में आवश्यकता होती है। विटामिन ‘ए’ सहित अधिकांश विटामिन मानव शरीर द्वारा नहीं बनाए जा सकते हैं और इसलिए वे आपके आहार का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। विटामिन ‘ए’ को कभी-कभी रेटिनॉल भी कहा जाता है। 

विटामिन ‘ए’ हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है। यदि हमारे शरीर में इसकी कमी हो जाये, तो मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। विटामिन ‘ए’ की कमी अपर्याप्त सेवन, मोटापे के खराब अवशोषण या यकृत विकारों (liver disorder) के कारण हो सकती है। विटामिन ‘ए’ की कमी के चलते शरीर का विकास नहीं हो पाता है। ऐसे कई संक्रमण हैं, जिनके प्रभाव होने से शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी हो जाती है। इसके अलावा विटामिन ‘ए’ की कमी सबसे ज्यादा हमारी आंखों को कमजोर करती है। 

इसकी कमी का सबसे अधिक जोखिम गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और छोटे बच्चों में होता है। सिस्टिक फाइब्रोसिस और लंबे वक्त तक दस्त भी आपके लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। आज हम इस ब्लाॅग में महिलाओं में होने वाली विटामिन ‘ए’ की कमी के बारे में बात करेंगे।


महिलाओं में विटामिन ‘ए’ की कमी

एक महिला अपने जीवन में शायद सबसे ज्यादा दर्द सहने की हिम्मत रखती है। हालांकि, फिर भी पुरूषों की तुलना में उन्हें कमज़ोर माना जाता है और अपने दिनचर्या के चलते वे बीमार ज्यादा रहती हैं। इसका एक कारण ये भी है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान नहीं देती। स्वास्थ्य को लेकर सजग न रहना महिलाओं की सबसे बड़ी गलती होती है। हमारे शरीर में कई तरह के विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की कमी से ही प्रतिक्षा प्रणाली (Immune System) कमज़ोर होती है, जो किसी भी तरह के संक्रमण से हमें बचा नहीं पाती। 

आपने अक्सर ये सुना होगा। विटामिन के सही मिश्रण के साथ अपने आप को स्वस्थ रखें। लेकिन कौन-सा विटामिन!... और क्या इनकी कमी को पूरा करने के लिए गोलियों का सेवन करना चाहिए या फिर अपने द्वारा खाए जाने वाले भोजन के माध्यम से पोषक तत्व प्राप्त करने चाहिए?

इसका सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप संतुलित आहार की मदद से अपने शरीर में विटामिन की कमी को पूरा कर सकते हैं। कई तरह के सप्लीमेंट भी इस गैप को पूरा करने में मददगार होते हैं। बात करें विटामिन ‘ए’ की, तो ये आमतौर पर बच्चों और महिलाओं को काफी ज्यादा प्रभावित करते हैं। 

हमारी आंखों की रोशनी, प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रजनन स्वास्थ्य और त्वचा की देखभाल जैसे कई शारीरिक कार्यों के रखरखाव के लिए विटामिन ‘ए’ एक  महत्वपूर्ण किरदार निभाता है। जब शरीर में विटामिन की कमी होती हैं, तो आंखों की रोशनी प्रभावित होने के साथ-साथ शरीर पर कई तरह के जख्म भी उभर आते हैं। 

गर्भावस्था के दौरान विटामिन ‘ए’ बच्चे के विकासशील अंगों, आंखों और हड्डियों के साथ-साथ रक्तवाही, श्वसन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी कि सेन्ट्रल नवर्स सिस्टम के लिए आवश्यक है। खाद्य पदार्थों में दो प्रकार के विटामिन ‘ए’ पाए जाते हैंः पूर्वनिर्मित विटामिन ‘ए’ (preformed vitamin A) और प्रोविटामिन ‘ए’ (provitamin A).

  1. प्रीफॉर्मेड विटामिन ‘ए’ को रेटिनॉल (retinol) के रूप में भी जाना जाता है और ये आमतौर पर मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है। 
  2. वहीं दूसरी ओर लाल, हरे, पीले और नारंगी फलों और सब्जियों जैसे पौधों के खाद्य पदार्थों में कैरोटीनॉयड (Carotenoids) को विटामिन ‘ए’ में परिवर्तित करता है। 


गर्भावस्था के दौरान आपको विटामिन ‘ए’ की आवश्यकता क्यों है?

विटामिन ‘ए’ एक वसा-घुलनशील (fat-soluble) विटामिन है जो लिवर में जमा होता है। विटामिन ‘ए’ आपके बच्चे के भ्रूण के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें हृदय, फेफड़े, गुर्दे, आंखों और हड्डियों के साथ-साथ रक्तवाही, श्वसन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का विकास शामिल है।

विटामिन ‘ए’ उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से आवश्यक है जो बच्चे को जन्म देने वाली हैं, क्योंकि यह पोस्टपार्टम ऊतक को बेहतर करने में मदद करता है। यह सामान्य दृष्टि बनाए रखने में भी मदद करता है, संक्रमण से लड़ता है, साथ ही आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता हैै, और फैट मेटाबोलिज्म में मदद करता है। 

किन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’ होता है?

लीवरः इस प्रकार के भोजन में बड़ी मात्रा में विटामिन ‘ए’ होता है। ऐसा माना जाता है कि विटामिन ‘ए’ की कमी से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 770 माइक्रोग्राम खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। वहीं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 1300 माइक्रोग्राम विटामिन ‘ए’ का सेवन करना चाहिए।  

मछलीः ऑयली फिश, शेलफिश और कॉड लिवर ऑयल, सभी में काफी मात्रा में विटामिन ‘ए’ होता है और इसे भोजन के साथ खाया जा सकता है या विटामिन सप्लीमेंट के रूप में भी इनका सेवन किया जा सकता है।

सब्जियांः नारंगी सब्जियों में विटामिन ‘ए’ का उच्चतम स्तर होता है। इनमें  शकरकंद, कद्दू, गाजर और स्क्वैश शामिल हैं। अन्य हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, साग और लेट्यूस भी इनके लिए एक बेहतर विकल्प हैं। विशेषज्ञ विटामिन ‘ए’ का पूरा लाभ पाने के लिए इन सब्जियों को पकाने या संसाधित करने की सलाह देते हैं ताकि, शरीर को इसके पोषक तत्वों को पचाने और अवशोषित करने में आसानी हो। 

डेयरी उत्पादः दूध आम तौर पर विटामिन ‘ए’ का एक अच्छा स्रोत है, हालांकि मलाई रहित दूध की मात्रा फुल क्रीम दूध की तुलना में कम होती है। कई नरम चीजों में विटामिन ‘ए’ भी हो सकता है, हालांकि पनीर व चेडर चीज में अन्य की तुलना में विटामिन ‘ए’ अधिक होता है।

फलः विटामिन ‘ए’ के उच्चतम स्तर वाले आम फल अक्सर नारंगी होते हैं - पके हुए आम, पपीता, खरबूजा, और खुबानी - जिन्हें सूखे तौर पर या ताजा खाया जा सकता है। 

गर्भावस्था में विटामिन ‘ए’ की कमी

विटामिन ‘ए’ की कमी के लक्षणों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और रात के वक्त कम दिखना शामिल है। रात में कम दिखना या कम रोशनी में देखने में असमर्थता गर्भवती महिलाओं में विटामिन ‘ए’ की कमी का सबसे आम लक्षणों में से एक है। इस स्थिति को जेरोफथाल्मिया कहा जाता है, और इसके परिणामस्वरूप कॉर्निया सूख जाता है और मोटा हो जाता है।


विटामिन ‘ए’ की कमी के लक्षण

विटामिन ‘ए’ की कमी के लक्षण गंभीरता के साथ अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में अधिक गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। नीचे कई संभावित लक्षण दिए गए हैं जिनका आप अनुभव कर सकते हैंः

रतौंधी (Night blindness): इससे आपको कम रोशनी में देखने में परेशानी होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विटामिन ए उन अणुओं को विकसित करने में मदद करता है जो आपको रंग देखने में मदद करते हैं जो कि रात की दृष्टि के लिए भी आवश्यक हैं।

जीरोफ्थैल्मिया: इस स्थिति के साथ, आंखें बहुत शुष्क और पपड़ीदार हो सकती हैं, जो कॉर्निया और रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में रात को पीड़ित ठीक तरह से अंधेरे में देखने में सक्षम नहीं होता है। 

संक्रमणः विटामिन ए की कमी वाले व्यक्ति को कई बार स्वास्थ्य संबंधी परशानियों का अनुभव हो सकता है क्योंकि वे संक्रमण से आसानी से नहीं लड़ पाते हैं। 

बिटोट स्पॉटः यह स्थिति आंखों में केराटिन का निर्माण करती है, जिससे धुंधलापन आने लगता हैै।

त्वचा में खराशः जिन लोगों को विटामिन ‘ए’ की कमी का सामना करना पड़ता है, उनकी त्वचा में सूखापन, खुजली और स्केलिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

किरेटोमलेशिया: यह एक आंखों की वह स्थिति है, जिसमें कॉर्निया का सूखना, परितारिका और पुतली के सामने की स्पष्ट परत।

केराटिनाइजेशनः यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोशिकाएं केराटिन प्रोटीन से भर जाती हैं, मर जाती हैं और मूत्र, जठरांत्र और श्वसन पथ में सख्त, प्रतिरोधी संरचनाओं का निर्माण करती है।

प्रजनन में समस्याएंः विटामिन ‘ए’ की कमी से गर्भधारण करने में समस्या हो सकती हैै, क्योंकि प्रजनन क्षमता के लिए इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है। विटामिन ‘ए’ शरीर को एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करने के लिए बहुत ज़रूरी है। 

अवरुद्ध विकास: विटामिन ‘ए’ मानव शरीर के समुचित विकास के लिए बहुत आवश्यक है। जो बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं, उनका शारीरिक विकास रुक जाता है। 


विटामिन ए की कमी से होने वाली बीमारियां 

  • अंधापन
  • एनीमिया
  • पेशाब में संक्रमण
  • कमज़ोर प्रतिक्षा प्रणाली
  • श्वासन प्रणाली में संक्रमण

निष्कर्ष

यदि आप अपने विटामिन ‘ए’ के स्तर के बारे में चिंतित हैं, तो विटामिन की जाँच के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। इससे निदान की मदद से आपके अंदर की स्थिति का आसानी से पता लगाया जा सकता है। यदि आप में विटामिन ‘ए’ की कमी पायी जाती है, तो डाॅक्टर की सलाह के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में आहार का सेवन करें और नियमित रूप से अपने डॉक्टर से अपनी जांच कराएं। 

हालांकि, विटामिन ‘ए’ की कमी काफी कम ही देखी जाती है क्योंकि हम कई ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जिनमें विटामिन से भरपूर होते हैं, फिर भी यह कुछ लोगों में हो सकता है। यदि आपको रात मे अंधापन जैसी गंभीर कमी के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

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