शादी के बाद नए रिश्तों को संभालने में अपनी पहचान न खोने दें!

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शादी का मतलब सपनों का खत्म होना नहीं होता। शादी के बाद भी आपकी जिंदगी आपकी ही होती है इस बात को भूलें नहीं! अपने सपनों से समझौता कर लेना कभी सही नहीं होगा! शादी के बाद सरनेम बदलना आपकी खुद की इच्छा है!

शादी के बाद रिश्तों के साथ-साथ अपनी पहचान को भी संभालें

‘मीनल को देखा है .. शादी के बाद पूरी बदल गई है।’ इस जगह आप मीनल को अपनी किसी दोस्त से बदल कर बेशक देख सकती हैं या फिर खुद से ही। एक नजर अपनी मां, भाभी या अपनी किसी शादी-शुदा दोस्त पर ले जाइए, और सोचिए आप उन्हें किस रूप में देख पाती हैं? 

क्या आपको आपकी मां, मां के अलावा कुछ और नजर आती हैं? आपकी भाभी शादी के बाद कैसी हैं और शादी से पहले कैसी थी? आपकी दोस्त जो शादी के बाद आपको बदली-बदली और उलझी-उलझी सी लगती है? आप इनमें कॉमन क्या देख पाती हैं - ये कि शादी के बाद इन्होनें अपनी खुद की पहचान खो दी है? और आपने??

शादी के बाद पति, घर, नए रिश्ते और आने वाले समय की चिंता में महिलाएं कब अपनी खुद की पहचान को काफी पीछे छोड़ आती हैं, ये उन्हें पता भी नहीं चलता! लेकिन, एक वक्त के बाद ये आपको अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती लग सकती है। 

आइए देखते हैं कि शादी के बाद, किस तरह से नए रिश्तों में मिठास बरकरार रखने के साथ-साथ आप अपनी पहचान को भी बरकरार रख सकती हैं।

1. शादी का मतलब सपनों का खत्म होना नहीं होता


अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लड़कियां शादी से पहले अपनी जिंदगी में कई चीजों का सपना देखती हैं। लेकिन शादी होने के बाद जैसे इन सपनों की भी विदाई हो जाती है। आपने जो ख्वाब देखें हैं, उन्हें पूरे करने की कोशिश करें। आप इसमें ससुराल वालों की मदद भी ले सकती हैं। सबके लिए जब आप समय निकाल सकती हैं तो थोड़ा-सा समय अपने सपनों के लिए भी निकालें।

  • शादी से पहले ही ससुराल वालों के सामने अपने सपनों का जिक्र करें
  • आप कोई नौकरी या कोई कोर्स करती हैं तो उसे छोड़ें नहीं
  • नोट्स बनाएं कि घर और बाहर आप कैसे मैनेज कर सकती हैं
  • ससुराल वालों से मदद की अपेक्षा और मांग दोनों रखें
  • अगर कोई न समझें, तो समझने के लिए उन्हें वक्त दें
  • याद रखें, कोशिश से सब मुमुकिन है!


2. पढ़ाई बिल्कुल न छोड़ें

पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। कई बार लड़कियों की शादी जल्दी तय हो जाती है जिसके कारण वो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाती। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको शादी के बाद जॉब करनी है या नहीं करनी, लेकिन कभी भी अपनी पढ़ाई को अधूरा न छोड़ें।

जिंदगी के किस मोड़ पर आपको पढ़ाई की जरूरत पड़ जाए आप सोच भी नहीं सकती। अगर बाहर जाकर पढ़ पाना संभव नहीं है तो कोशिश करें ऑनलाइन या डिस्टेंस कोर्स करने की। इससे आप घर पर समय भी दे पाएंगी और अपनी पढ़ाई को भी।

3. सरनेम बदलना आपकी खुद की इच्छा है!

शादी का मतलब ये नहीं होता कि आप किसी और के नाम से जानी जाए! हमारे देश का कानून भी ऐसा नहीं कहता कि शादी के बाद लड़की का नाम बदलना जरूरी है!

हालांकि, कुछ लड़कियों को अपने नाम के साथ अपने पति का नाम लगाना पसंद होता है। याद रखें, सरनेम बदलना या न बदलना पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। 

ऐश्वर्या राय बच्चन की तरह आप चाहे तो अपने नाम के साथ-साथ अपने पति के नाम को भी जोड़ सकती हैं! नाम में बदलाव का ये तरीका आज कल ट्रेंड में है।

अगर आप सरनेम बदलने का सोच रही हैं या बदल चुकी हैं तो इसका मतलब ये नहीं है आपका अब कोई अस्तित्व नहीं! सरनेम आपका हो या आपके पति का, भूलें नहीं जिंदगी आपकी है और फैसला आपका!

4.खट्टे-मीठे नए रिश्ते

जरूरी नहीं है कि आपको अगर पति का साथ मिल रहा है तो घर के बाकी लोगों का भी मिलें! परिवार के कई लोग आपके विचार और फैसलों से अक्सर नाखुश हो सकते हैं।

यहां आपको दो बातें ध्यान रखनी हैं : 

  • एक, कई बार लोग नाराज होंगे लेकिन आपका फैसला सही होगा;
  • वहीं दूसरी, आपकी छोटी सी हामी अन्य परिवारजनों को खुश कर सकती हैं!

फैसला आपके हाथ में हैं, लेकिन झुकें उतना ही जितना जरूरी हो। घर के छोटे-बड़े फैसलों में हिस्सा लें, सलाह दें और अपना अनुभव साझा करें। इससे लोग आपकी अहमियत करना सीखेंगे। चुपचाप सब कुछ में सिर हिला देना आपके परिवार के बीच आपको कमजोर दिखा सकता है। बातों में नरमी रखें ताकि बात भी रहे और किसी का दिल भी न दुखें!

5. कंधे से कंधा मिलाना है जरूरी

हो सकता है कि आपके रिश्ते में पति वर्किंग हो और आप हाउसवाइफ। ऐसे में खुद को कभी छोटा न समझें। हाउस वाइफ होना भी कोई आसान बात नहीं है और ये भी एक फुल टाइम जॉब है। कभी भी किसी को ये मौका न दें कि आपके घर में काम करने के फैसले को लेकर कोई सवाल करे। अपने लिए खुद खड़ा होना और बोलना सीखें! आपका काम और समय भी उतना ही जरूरी है जितना आपके पति का। जब आप खुद अपने काम की इज्जत करेंगे तो दूसरे भी जरूर करेंगे।


6. घर में हो बराबर की भागीदारी

घर के किसी भी तरह के कार्यक्रम में अपने पति के बराबर ही हिस्सा लेने का प्रयास करें। अगर आप जॉब करती हैं तो घर खर्चे में भी मदद करें और अपने पति से घर के कामों में मदद करने को भी कहें। इस बात को धीरे-धीरे परिवार वालों को समझाने का प्रयास करें कि किसी भी काम पर किसी का नाम नहीं लिखा होता। लड़के और लड़की दोनों घर का,और घर के बाहर का ख्याल रख सकते हैं।

7. निजी फैसले खुद करें

आप शादी के कितने दिन के बाद फैमिली प्लान करना चाहती हैं? आपकी निजी जिंदगी में क्या चल रहा है? आप अपने घर पर सैलरी से कितने पैसे देती हैं? इस तरह के सवालों का जवाब दूसरों के दबाव में आकर न दें। ऐसा कोई फैसला न करें जो आपकी जिंदगी पर बड़ा असर डालता हो। 

वैसे तो जमाना बदल रहा है, आज कल लोग प्राइवेसी की इज्जत करते हैं। लेकिन अगर आपको ऐसे परिवार न मिला हो तो भी धीरे-धीरे उन्हें समझाने का प्रयास करें। अगर आप ज्यादा डिस्टर्ब हो रही हैं तो सीधी तौर पर कहें कि आपको अपनी प्राइवेट बातें शेयर करना पसंद नहीं है।


8. खुद का ख्याल जरूर रखें

परिवार वालों का ख्याल रखना जरूरी है। उतना ही जरूरी है खुद का ख्याल रखना। शादी के बाद भी खुद को समय दें और जिंदगी खुलकर जिएं।

  • समय-समय पर वो करें जो आपको पसंद है
  • मायके वालों की हमेशा मदद करें
  • अपना पैशन कभी न छोड़ें
  • शादी के बाद कुछ नया सीखना चाहती हैं तो जरूर सीखें
  • किसी बात का बुरा लगे तो खुलकर सबके सामने कहें

सारांश


हर किसी का परिवार और सोच अलग-अलग होती है। हो सकता है कि शादी से पहले आपने जो सोचा हो शादी के बाद चीजें उससे बिल्कुल अलग हों। लेकिन ऐसे में हार मानकर परिस्थिति से समझौता करने की बजाय, इस समस्या की राह ढूंढने की कोशिश करें। शादी में रिश्तों को मद्देनजर रखते हुए अपनी पहचान को गुम हो जाने का मौका न दें।

 

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