शिक्षक दिवस - एक अलग नजरिए से!

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शिक्षक दिवस - क्यों है इतना खास?

यूं तो हम सबको पता है कि भारतीय संस्कृति में भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर 5 सितंबर को उनके सम्मान में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। सालों से मनाए जा रहे शिक्षक दिवस का उल्लास बच्चों में आज तक बिल्कुल पहले जैसा ही है।

देश के अलग-अलग स्कूलों में शिक्षक दिवस को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस दिन कई स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। हमारे स्कूल में शिक्षक दिवस के दिन बच्चों को एक दिन के लिए शिक्षक बनना होता था। इस रिवाज के पीछे का मायना यह था कि बच्चों को भी समझ आना चाहिए कि शिक्षक का काम कितना कठिन होता है।

शिक्षक दिवस इतना खास क्यों हैं? आइए एक अलग नजरिए से देखते हैं।



भूलें नहीं,शिक्षक भी एक आम इंसान है!

बच्चे जब स्कूल में शिक्षक की बुराई कर रहें होते हैं या उनके निक नेम रख रहें होते हैं तो उस वक्त उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए कि वो शिक्षक भी एक आम इंसान ही है। एक आम इंसान जिसका एक परिवार है, जिसके सर पर भी चिंताऐं हैं, जो अपनी पूरी कोशिश करता है कि आपके सामने वह मात्र एक शिक्षक की भूमिका में हो। शिक्षक दिवस के दिन बच्चों को अपने शिक्षक को एक मार्गदर्शक और एक दोस्त के रूप में भी देखना चाहिए और उनकी मेहनत के लिए उन्हें धन्यवाद कहना चाहिए।


शिक्षक होना आसान नहीं है!

एक पीरियड में किसी एक सब्जेक्ट पर क्लास ले लेना अगर आपको आसान लगता है तो बेहतर होगा आप भी कुछ दिन के लिए शिक्षक बनकर देखें। कभी आपने सोचा है कि दुनिया के तमाम प्रोफेशन को आगे बढ़ाने वाला शिक्षक ही होता है। आपके क्लासरूम में बैठने वाले सभी बच्चे शिक्षक के मार्गदर्शन से जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल करेंगे। लेकिन, इन सभी बच्चों को जिंदगी में आगे बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षक भी अपनी पूरी जिंदगी गुजार देते हैं।



कोरोना वॉरियर तो शिक्षक भी हैं!

कोरोना ने सबकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। दो साल होने वाले हैं और ज्यादातर स्कूल और कॉलेज बंद पड़े हैं। लेकिन पढ़ाई ऑनलाइन होती आ रही हैं। आज कल के बच्चों के लिए ऑनलाइन एजुकेशन आम बात हो सकती है लेकिन कई शिक्षक के लिए यह काफी कठिन रहा। नई तकनीक को सीखना, बच्चों को उसके माध्यम से पढ़ाना और भी कितना कुछ!

स्कूल में तो बस बच्चे शिक्षक को सुना करते थे, लेकिन घर पर बच्चों के साथ-साथ उनका परिवार भी लेक्चर को सुन रहा होता है। अपने घर की जिम्मेदारियां  संभालने के साथ-साथ इस कोरोना काल में हर शिक्षक ने बच्चों की पढ़ाई को पूरी तरह से संभालने की भी कोशिश की है। 



पेरेंट्स सिखाएं शिक्षक की इज्जत करना! 

आपके बच्चे वही करेंगे जो वो सीखेंगे। हर पेरेंट्स को अपने बच्चों को यह जरुर सिखाना चाहिए कि गुरु का दर्जा सबके ऊपर होता है और बच्चों को उनकी इज्जत करनी चाहिए। जब बच्चे टीचर की शिकायत लेकर आएं तो उनकी बात को गौर से सुनें और तय करें कि उस शिकायत पर कैसे रिएक्ट किया जा सकता है। हो सकता है कुछ मामलों में शिक्षक की ही गलती हो, ऐसे में कभी भी बच्चों के सामने शिक्षक को अपशब्द न कहें बल्कि पहले टीचर से अकेले में जाकर बात करें। वरना आपका बच्चा भविष्य में सभी टीचर को गलत समझ सकता है।

 

सारी जिम्मेदारी टीचर की नहीं है!

बच्चों का स्कूल में एडमिशन करा देने का मतलब ये नहीं होता है कि वो अब बस टीचर की ही जिम्मेदारी हैं। आपको भी पेरेंट्स होने के नाते बच्चों पर पूरा ध्यान देना चाहिए। हो सकता है टीचर ने जो पढ़ाया हो वो बच्चों को एक बार में समझ न आए! 

स्कूल के बाद बच्चे जब घर आएं तो उनके होमवर्क चेक करें, उन्हें पूरा करने में उनकी मदद करें, उनके सिलेबस पर भी ध्यान रखें। अगर आपके पास इन सब के लिए वक्त नहीं है तो आप प्राइवेट ट्यूशन की भी मदद ले सकते हैं। 

स्कूल में 50-60 बच्चे एक क्लास में होते हैं ऐसे में टीचर के लिए हर बच्चे पर पूरी तरह ध्यान दे पाना मुश्किल होता है। आपको भी अपने बच्चे के लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए। वैसे भी बच्चे के लिए पहले शिक्षक उनके माता-पिता ही होते हैं।

शिक्षक भी शिक्षक दिवस की गरिमा बरकरार रखें!

शिक्षक दिवस के अवसर पर सिर्फ बच्चों की ही जिम्मेदारी नहीं होती कि वो शिक्षक को समझें बल्कि उतनी ही जिम्मेदारी शिक्षक की भी होती है। कई बार शिक्षक कुछ ऐसा कर जाते हैं जो उन्हें बच्चों के साथ गलती से भी नहीं करना चाहिए।

आइए देखते हैं कहां शिक्षक भी बच्चों को समझने की कोशिश नहीं करते हैं!

मारना कोई इलाज नहीं है।

कई बार टीचर को लगता है कि बच्चे की गलती उन्हें मारकर ठीक हो जाएगी। ऐसा नहीं होता बल्कि इससे दो स्थितियां उत्पन्न होती हैं - बच्चा आपसे नफरत करने लगेगा या बच्चे को मार से फर्क पड़ना बंद हो जाएगा।

आप सोच भी नहीं सकते हैं बच्चे के कोमल मन पर आपकी दी हुई ये सजा जिंदगी में कब तक हरी रहेगी। किसी को भी चोट पहुंचाना कभी सही नहीं होता है। आप किसी बच्चे को मारकर शाम को घर लौटते वक्त भूल जाएंगे लेकिन बच्चा उसे अपनी जिंदगी भर याद रखेगा। 

सोच कर देखिए आपको कैसा लगेगा जब बच्चा बड़े होने के बाद आपसे किसी से मिलवाने पर कहेगा कि ये वही टीचर हैं जो बचपन में मुझे बहुत मारते थे, जिन्होनें मुझे कभी नहीं समझा!



ऐसा नहीं है कि बच्चों को इज्जत का मतलब पता नहीं होता!

अपनी जिंदगी में और सोशल मीडिया पर कई किस्से हैं कि बच्चे टीचर के द्वारा कैसे बेइज्जत किए जाते हैं। किसी भी बच्चे को उसके रंग, शरीर या किसी और चीज से चिढ़ाना बंद कर दें। आप जो बच्चों के साथ करेंगे वही बच्चा आगे लोगों के साथ करेगा। 

छोटे शहरों के स्कूल में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि टीचर बच्चों का मजाक बनाते रहते हैं। लेकिन यह बर्ताव कहीं से भी सही नहीं है। गुस्से में आकर भी बच्चे से कोई ऐसी बात न कहें जो आप चाहते हैं कि कोई आपके बच्चों से न कहें।

बच्चे की अगर गलती है तो सजा के रूप में उसे ज्यादा होमवर्क दें, पेरेंट्स को बुलाने को कहें लेकिन कभी भी सारी क्लास के सामने उसका मजाक न उड़ाएं और ना पर्सनल रूप में उसे किसी चीज के लिए टोकें।




जो पढ़ाई में बेहतर है उसे फेवरेट न बनाएं!


अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जो बच्चे पढ़ाई में बेहतर होते हैं टीचर उन्हें अपना फेवरेट बना लेते हैं और जो बच्चे कमजोर होते हैं उन्हें बस सीख लेने को कहते रहते हैं। 

यह याद रखें कि जो बच्चा पढ़ाई में अच्छा है इसमें जरूरी नहीं कि सिर्फ उसकी ही मेहनत हो। ज्यादातर ऐसे बच्चों के पेरेंट्स, प्राइवेट ट्यूशन या बड़े-भाई बहन हेल्प करने वाले होते हैं।

ठीक इसी तरह और जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं जरूरी नहीं कि वे पढ़ने की कोशिश नहीं करते हैं। हो सकता है उनके घर में कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा न हो, उन्हें कोई समझाने वाला न हो। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सभी टीचर को कमजोर बच्चों पर थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए।

 

सिर्फ नंबर लाना ही लक्ष्य नहीं है!

यह मनाना और जबरदस्ती बच्चों को मनवाना बंद कर दें कि जिंदगी का मकसद सिर्फ एग्जाम में नंबर लाना होता है। जरूरी नहीं कि हर बच्चे को पढ़ाई में ही मन लगे और ये भी जरूरी नहीं कि हर बच्चे को हर सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स आएं। 

दुनिया बदल रही है और सफलता के मायने भी! ऐसे में अपनी सोच को भी बदलना बेहद जरूरी है। किसी बच्चे की खेलने में रूचि तो उसे इसके करियर ऑप्शन के बारे में समझाएं। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे अपनी रुचि में कैसे अच्छा कर सकते हैं ये समझाना पूरी तरह से एक शिक्षक का ही काम है।

प्रोत्साहन सिर्फ नंबर लाने पर ही नहीं बल्कि एक अच्छी पेंटिंग बनाने, गाना गाने, डांस करने, एक्टिंग करने, खाना बनाने आदि पर भी मिलना चाहिए।

 

सरकारी नौकरी वाले टीचर!

प्राइवेट स्कूल में तो खानापूर्ति की गुंजाइश कम होती है लेकिन सरकारी स्कूल में ये भर-भर के होती है। यहां सभी शिक्षक की बात नहीं की जा रही है बल्कि उनकी की जा रही है जो खुद को शिक्षक नहीं बल्कि मात्र एक सरकारी नौकर मानते हैं।

सरकारी स्कूल के बच्चे गरीब हैं इसीलिए वहां जाते हैं, लेकिन कुछ शिक्षक नींद की आड़ में उनके भविष्य को अंधकार में धकेल रहें होते हैं।

हर साल आप कितने बच्चों का भविष्य खराब कर रहें! एक प्रकार का देश द्रोह तो इसे भी माना जा सकता है। कोशिश करें कि आप और भी मेहनत से इन बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें ताकि इनके साथ-साथ भारत का भविष्य भी उज्ज्वल हो।

 

निष्कर्ष 

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में तभी सार्थक हो सकता है, जब सब इसकी तरफ अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे! वो कहते हैं नजर बदलें, नजारे बदल जाएंगे!

 

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